क्या हम नवजात शिशु को पाउडर वाला दूध दे सकते हैं?HealthPlanet

Posted on Tue 18th Oct 2022 : 09:37

नवजात शिशु को केवल तीन चीजों की जरूरत होती है - मां की गोद, मां का दूध और मां के आंचल में सुरक्षा। स्‍तनपान से इन तीनों जरूरतों को पूरा किया जा सकता है लेकिन अगर शिशु को मां के दूध की जगह पाउडर मिल्‍क दिया जाए तो इसका क्‍या असर पड़ता है?

नौ महीने की प्रेग्‍नेंसी और डिलीवरी के बाद मां की अगली जिम्‍मेदारी होती है शिशु को दूध पिलाना। केवल किसी गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या के चलते ही शिशु को मां का दूध नहीं दिया जाता है। हालांकि, अब नौकरी या अन्‍य वजहों से पाउडर या फॉर्मूला मिल्‍क को भी तवज्‍जो मिलने लगी है।


लेकिन क्‍या आप इस बात से वाकिफ हैं कि शिशु के लिए पाउडर मिल्‍क सुरक्षित होता है या नहीं और शिशु को इससे किसी तरह का कोई नुकसान तो नहीं पहुंचता।

क्‍या होता है पाउडर मिल्‍क
ब्रेस्‍ट मिल्‍क के विकल्‍प के तौर पर पाउडर या फॉर्मूला मिल्‍क दिया जाता है। डिलीवरी के बाद सभी महिलाओं के स्‍तनों में पर्याप्‍त दूध नहीं बन पाता है, ऐसी स्थिति में पाउडर मिल्‍क दिया जा सकता है। लिक्विड मिल्‍क को वेपराइज करके मिल्‍क पाउडर बनाया जाता है। इससे शिशु को कई पोषक तत्‍व मिल जाते हैं।
Baby Food: जानें बच्चों को कब और कैसे खिलाएं शहद, सेहत के लिए क्या हैं इसके फायदे

- आमतौर पर 1 वर्ष या इससे अधिक उम्र के बच्चों को शहद चटाना चाहिए। दरअसल एक वर्ष के बाद बच्चों को शहद देने से किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या नहीं होती है और बच्चों को आहार का स्वाद भी समझ में आने लगता है।
-

1 वर्ष या इससे अधिक उम्र के बच्चों को समय पर शहद खिलाने से त्वचा से जुड़ी समस्याएं जैसे एक्जिमा या सोरायसिस नहीं होता है। इसके अलावा भी शहद चटाने से स्वास्थ्य को कई फायदे होते हैं।
-

शहद का सेवन करने से बच्चा तंदुरुस्त रहता है और शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिलती है।
-

शहद में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो बच्चों के शरीर में सूजन की समस्या को कम करता है और आंतरिक अंगों को भी मजबूत रखता है।
-

छोटे बच्चों के पेट में अक्सर कब्ज या गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज की समस्या होती है। बच्चे को शहद खिलाने से पेट संबंधी समस्याएं और एसिडिटी दूर हो जाती है।
-

दूध पीने के कारण कई बार बच्चों के मुंह से दुर्गंध आती है। ऐसी स्थिति में बच्चे को शहद चटाने से मुंह की दुर्गंध दूर हो जाती है। शहद में एंटी बैक्टीरियल गुण पाया जाता है जो ओरल हेल्थ के लिए फायदेमंद होता है।
-

शहद में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाया जाता है जो इम्युनिटी को बढ़ाने के साथ ही लिवर को भी सुरक्षा प्रदान करता है। बच्चे की इम्युनिटी मजबूत होने पर बीमारियों से बचाव होता है।
-

बच्चों को चम्मच या निपल से कम मात्रा में शहद देना चाहिए। इससे यह जानने में आसानी होती है कि शहद से बच्चे को कोई एलर्जी हो रही है या नहीं। इसके अलावा बच्चों को निम्न तरीकों से शहद दिया जा सकता है:
ओटमील में शहद मिलाकरजैम की जगह ब्रेड पर शहद लगाकरदही में शहद मिलाकरस्मूदी में शहद मिलाकर
-
बच्चों को हमेशा शुद्ध शहद देना चाहिए।एलर्जी होने पर बच्चे को शहद देना बंद कर देना चाहिए।शहद में चीटियां लग गयी हों तो बच्चे को न दें।

इस तरह औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण एक वर्ष के बाद बच्चों को शहद खिलाना बेहद फायदेमंद होता है। हालांकि डॉक्टर की सलाह लेकर ही बच्चे को शहद देना चाहिए।


पाउडर मिल्‍क पीने के फायदे
शिशु को पाउडर मिल्‍क देने के भी कई फायदे होते हैं जैसे कि :

इसमें आयरन, कैल्शियम और विटामिन होते हैं जो शिशु में एनीमिया को रोकने में मदद करते हैं।
आप शिशु को कभी भी और कहीं भी पाउडर मिल्‍क दे सकती हैं।
निप्‍पल में दर्द और दूध लीक होना आम समस्‍याएं हैं। ऐसे में आप दर्द से बचने के लिए पाउडर मिल्‍क का इस्‍तेमाल कर सकती हैं।
पाउडर मिल्‍क शिशु को पिलाने के लिए हर समय मां की जरूरत नहीं पड़ती है। घर का कोई भी सदस्‍य पाउडर मिल्‍क तैयार कर बच्‍चे को पिला सकता है।
शिशु को स्‍तनपान करवाने की वजह से महिलाओं को अपनी डायट का बहुत ध्‍यान रखना पड़ता है, लेकिन पाउडर मिल्‍क के साथ ऐसा नहीं है। इसमें मांएं अपनी पसंद का कुछ भी खा सकती हैं।

आमतौर पर 1 वर्ष या इससे अधिक उम्र के बच्चों को शहद चटाना चाहिए। दरअसल एक वर्ष के बाद बच्चों को शहद देने से किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या नहीं होती है और बच्चों को आहार का स्वाद भी समझ में आने लगता है।
-

1 वर्ष या इससे अधिक उम्र के बच्चों को समय पर शहद खिलाने से त्वचा से जुड़ी समस्याएं जैसे एक्जिमा या सोरायसिस नहीं होता है। इसके अलावा भी शहद चटाने से स्वास्थ्य को कई फायदे होते हैं।
-

शहद का सेवन करने से बच्चा तंदुरुस्त रहता है और शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिलती है।
-

शहद में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो बच्चों के शरीर में सूजन की समस्या को कम करता है और आंतरिक अंगों को भी मजबूत रखता है।
-

छोटे बच्चों के पेट में अक्सर कब्ज या गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज की समस्या होती है। बच्चे को शहद खिलाने से पेट संबंधी समस्याएं और एसिडिटी दूर हो जाती है।
-

दूध पीने के कारण कई बार बच्चों के मुंह से दुर्गंध आती है। ऐसी स्थिति में बच्चे को शहद चटाने से मुंह की दुर्गंध दूर हो जाती है। शहद में एंटी बैक्टीरियल गुण पाया जाता है जो ओरल हेल्थ के लिए फायदेमंद होता है।
-

शहद में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाया जाता है जो इम्युनिटी को बढ़ाने के साथ ही लिवर को भी सुरक्षा प्रदान करता है। बच्चे की इम्युनिटी मजबूत होने पर बीमारियों से बचाव होता है।
-

बच्चों को चम्मच या निपल से कम मात्रा में शहद देना चाहिए। इससे यह जानने में आसानी होती है कि शहद से बच्चे को कोई एलर्जी हो रही है या नहीं। इसके अलावा बच्चों को निम्न तरीकों से शहद दिया जा सकता है:
ओटमील में शहद मिलाकरजैम की जगह ब्रेड पर शहद लगाकरदही में शहद मिलाकरस्मूदी में शहद मिलाकर
-
बच्चों को हमेशा शुद्ध शहद देना चाहिए।एलर्जी होने पर बच्चे को शहद देना बंद कर देना चाहिए।शहद में चीटियां लग गयी हों तो बच्चे को न दें।

इस तरह औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण एक वर्ष के बाद बच्चों को शहद खिलाना बेहद फायदेमंद होता है। हालांकि डॉक्टर की सलाह लेकर ही बच्चे को शहद देना चाहिए।


पाउडर मिल्‍क पिलाने के दुष्‍प्रभाव
किसी भी चीज का अगर फायदा होता है तो उसके कुछ नुकसान भी जरूर होते हैं।

ब्रेस्‍ट मिल्‍क फ्री होता है जबकि पाउडर मिल्‍क बहुत महंगा आता है। इसके बाद दूध की बोतल और निप्‍पल का खर्च अलग।
पाउडर मिल्‍क में बोतल और निप्‍पल को बार-बार धोना, दूध को गर्म करना और दूध तैयार करने जैसे काम भी करने पड़ते हैं जबकि ब्रेस्‍ट मिल्‍क पिलाना आसान होता है।मां के दूध में जरूरी एंटीबॉडीज और ग्रोथ हार्मोन प्राकृतिक रूप से मौजूद होते हैं। पाउडर मिल्‍क में इन चीजों की कमी होती है। इसकी वजह से बच्‍चे जल्‍दी बीमार पड़ते हैं और उनमें संक्रमण होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
मां का दूध आसानी से पच जाता है जबकि फॉर्मूला और पाउडर मिल्‍क को पचाना मुश्किल होता है। इससे शिशु को कब्‍ज और गैस की परेशानी हो सकती है।

solved 5
wordpress 3 years ago 5 Answer
--------------------------- ---------------------------
+22

Author -> Poster Name

Short info